गरीब एवं दलित परिवार से जुड़े उस हीरो की कहानी जिसने अपना सफर शून्य से आरंभ किया और आज शिखर पर है।

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रियल हीरो की दस्तान 
खबर ऑफ़ इंडिया
नंगे पांव फटी सिली शर्ट हाफ पेंट पहने एक बालक अपनी पढ़ाई के लिए चुने की तगारी माथे पर उचाए मजदूरी करता है । मन में ख्याल बस पढ़ना है मुझे मुकाम हासिल करना है मुझे।

आज सरकार ने शिक्षा निशुल्क की है किंतु तीन दशक पहले स्कूलों में पढ़ाई करना हर किसी के बस की बात नहीं पढ़ना तो दूर गांवो में स्कूल भी नहीं थे ऐसी परिस्थितियों में अपने अध्ययन को अनवरत जारी रखते हुए गरीब मजदूर परिवार से
उठे प्रतिभावान बालक अपनी प्रतिभा के बूते पर प्रशासनिक सेवा में अतिरिक्त जिला कलेक्टर की पद को सुशोभित कर रहा है।
शिक्षा के लिए या यूं कहें पढ़ाई के लिए कोई बहाना नहीं जो लक्ष्य तय किया था उस मुकाम को हासिल करने के लिए कितनी परेशानियां आई उन सब मिथकों को तोड़ते हुए इस मुकाम तक पहुंचने की यह कहानी नहीं उसके जीवन का एक पहलू भी है।
प्रतिभावान बाल मजदूर ने शून्य से अपना सफर आरंभ कर आज शिखर को छू लिया है । यह प्रतिभाशाली बालक जिसने अपने सफलता के आयाम अपने बलबूते पर हासिल करते हुए फर्श से अर्श तक का सफर किया है।
जीवन में उतार चढ़ाव देख मुकाम हासिल करने वाले का नाम है मोहनलाल खटनवालिया जो अब नागौर जिला अतिरिक्त जिला कलेक्टर के पद को सुशोभित करेंगे।
जी हां हम बात कर रहे हैं हमारे अजीज आमजन गरीब के हितेषी एसडीएम से अतिरिक्त जिला कलेक्टर बने मोहनलाल खटनवालिया के जीवन से जुड़े उन पहलुओं की किशनगढ़ रेनवाल ग्राम में गरीब के घर जन्मे मोहनलाल खटनवालिया का जीवन कठिनाइयों भरा रहा निरंतर घर के हालातों से लड़ते हुए अपना मुकाम हासिल करने के लिए मजदूरी कर अपनी किताबों और फीस का जुगाड़ किया और एक शिक्षक के पद तक पहुंचे ।
शिक्षक के पद पर पहुंचने के पश्चात निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा परिवारजनों से मिली और शिक्षक से
खटनावालिया अपनी मेहनत के बल पर तहसीलदार बने राजस्व विभाग में तहसीलदार बनने के बावजूद अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए
खटनावलिया ने अपने हौसलों की उड़ान को कभी कम नहीं होने दिया जिसके परिणाम स्वरूप उनका प्रशासनिक सेवा में एसडीएम पद पर चयन हुआ ।
एसडीएम पद पर चयन होने के बाद हर अधिकारी की अपनी अपनी कार्यशैली होती है उसी कार्यशैली में
खटनावलिया ने भी अपनी एक अलग ही कार्यशैली को बनाया अपने नाम मोहन को सार्थक करते हुए जब मोहन ने बंसी बजाई
उस बंसी की धुन पर एक से बढ़कर एक भामाशाह आगे आने लगे। भामाशाह का सहयोग गरीब शिक्षा बच्चों पर भामाशाह द्वारा ने सहयोग दिया।
भामाशाह सहयोग के पीछे उनका एक ही उद्देश्य है कि कोई भी गरीब बच्चा आर्थिक परेशानियों की वजह से पीछे नहीं रहे जैसी परेशानी अध्ययन के लिए बचपन में उन्होंने देखी थी ऐसी कोई परेशानी छात्र जीवन में कोई बच्चा नहीं झेलनी पड़े इस उद्देश्य के लिए खटनावलिया ने भामाशाह को प्रेरित किया ।
बालिका शिक्षा हो स्कूलों का विकास हो पर्यावरण का मामला हो पालनहार योजना हो विधवा पेंशन हो या किसी गरीब के आवास का मामला राजस्थान प्रदेश में भामाशाहओं को प्रेरित कर सर्वाधिक सहयोग प्राप्त करने वाले प्रेरक के रूप में हमारे मोहनलाल खटनावलिया का नाम स्वर्ण अक्षरों में है ।
रिया बड़ी एसडीएम पद पर रहते हुए जब उन्होंने देखा कि अंधेरे कमरों में शौचालय की बदबू से परेशान हमारी बेटियां बालिकाएं कैसे अध्ययन कर रही है उन बालिकाओं की पीड़ा को समझते हुए
खटनावलिया ने गांधीधाम गुजरात हाल मुकाम लाडपुरा के नेमीचंद जी जांगिड़ को बालिका विद्यालय भवन निर्माण के लिए प्रेरित किया उन्हीं की प्रेरणा से स्वच्छ वातावरण में माता मोहनी देवी के नाम से बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय रिया बड़ी में संचालित हो रहा है। रिया बड़ी में भामाशाह को शिक्षा एवं सामाजिक स्तर पर प्रेरित करने से आमजन का स्नेह जुड़ा। रिया बड़ी से तबादला होकर पाली जिले के रायपुर तहसील में एसडीएम पद पर पहुंचे । रायपुर एसडीएम पद पर रहते हुए शिक्षा में भामाशाह का सहयोग सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने वहां के भामाशाह को प्रेरित कर गिरि ग्राम के विद्यालय सहित अन्य विद्यालयों में कक्षा कक्ष का निर्माण हो, अतिक्रमण हो या विकास कार्यों के मामले हो इन सभी कामों को प्राथमिकता से करवाया।
रायपुर से उपखंड अधिकारी अजमेर जिले के मसूदा तहसील में एसडीएम पद पर पहुंचे 3 वर्ष के एसडीएम के कार्यकाल में मसूदा तहसील में भामाशाहओं को प्रेरित कर सात करोड़ से भी अधिक के कार्य मसूदा तहसील के विद्यालय में करवाए गए मसूदा तहसील में छात्र छात्राओं के विद्यालय में छात्रों के लिए ट्रैक सूट वाटर कूलर विद्यालय में कक्षा कक्ष के निर्माण सहित अन्य संसाधनों के लिए खटनावलिया के आह्वान पर भामाशाह ने बढ़-चढ़कर सहयोग दिया। राजस्थान प्रदेश में सरकार द्वारा संचालित पालनहार योजना में खटनावालिया ने सर्वाधिक पालनहार योजना में परिवारों को जोड़ने ग़रीबों को लाभान्वित के नेक कार्य में नाम दर्ज करवाते हुए गरीब बच्चों को इस योजना से जोड़ा है।
विधवा पेंशन के मामले हो या जिनके माता-पिता का आशियाना उठने के बाद आवास बनाने का मामला हो ऐसे मामलों में खटनावलिया ने सरकारी सहायता के साथ-साथ भामाशाह को प्रेरित कर गरीबों का भला किया है ।
इस कार्यशैली से आमजन का जुड़ाव खटनावलिया जी के साथ आमजन स्नेह के साथ साथ गरीब की दुआओं से भी जुड़ा है।
इन दुआओं का असर है एसडीएम मोहनलाल खटनावलिया आज मसूदा के एसडीएम पद से अतिरिक्त जिला कलेक्टर के पद पर प्रमोशन होकर नागौर आ रहे हैं अगर इनका प्रमोशन नहीं होता एसडीएम पद पर ही रहते तो कदाचित इनके इसने सेवा भाव के कारण आमजन गरीब जनता आंदोलन कर देती, किंतु उनका स्नेह एवं दुआओं के कारण प्रमोशन हुआ है तो वहां का गरीब आमजन एवं विधायक राकेश पारीक जनप्रतिनिधि एवं भामाशाह भी खुश है । वही नागौर जिले में रिया बड़ी की जनता भी अपने एसडीएम को अतिरिक्त जिला कलेक्टर के रूप में देखकर हर्षित है।

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