गरीब गांव एवं विद्यालय का सामूहिक जन सहभागिता से हो विकास/ जिला कलेक्टर

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उजास अभियान में जिला कलेक्टर की मेहनत लाई रंग

जिले के मात्र दो विद्यालय डिमांड राशि की अधिकता के कारण विद्युत कनेशन से वंचित स्कूलों में बिजली कनेक्शन के लिए उजास ,कुपोषित बच्चो के लिए पोष्टिक किट, विद्यालय विकास के लिए भामाशाह ,ग्राम विकास के लिए हरित तालाब अब कोई बच्चा नंगे पांव नहीं रहे इस के लिए जिला कलेक्टर चलाएंगे चरण पादुका अभियान
रियांबड़ी से एस एन शर्मा की यह खास रिपोर्ट
जिला कलेक्टर डॉ जितेंद्र सोनी के राज्य स्तर पर सम्मानित होने पर खबर ऑफ इंडिया की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

”कौन कहता है कि आसमान में छेद नहीं होता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो” जैसी कहावत को नागौर जिले के युवा जिला कलेक्टर डॉ जितेंद्र सोनी ने चरितार्थ किया है। जिला कलेक्टर डॉ जितेंद्र सोनी की कार्यशैली ने नागौर जिले के गांव व विद्यालयों की सूरत ही बदल दी जिला कलेक्टर की कार्यशैली ग्राम के विद्यालय के विकास एवं संसाधनों से ज्यादा से ज्यादा लाभ ग्राम के बच्चों को मिल सके अपनी इस कार्यशैली को जिला कलेक्टर ने अभियान बना दिया । अपने छोटे गांव के सरकारी विद्यालय में पढ़ लिख कर अपनी मेहनत से मुकाम हासिल करने वाले जिला कलेक्टर डॉ जितेंद्र सोनी को पता है कि विद्यालय में किन संसाधनों की कमी से वहां का स्टाफ एवं बच्चे रूबरू होते हैं और वही कमी उनके भविष्य पर भी प्रभाव डालती है सरकारी विद्यालयों में संसाधनों के नितांत अभाव एवं इस अभाव से बच्चों के भविष्य पर कोई प्रभाव या छाप नहीं पडे ग्राम के विद्यालय में वह सभी सुविधाएं उपलब्ध हो जो एक शहर के विद्यालय में उपलब्ध होती है। शत प्रतिशत आधुनिक संसाधनों से युक्त धनाढ्य वर्ग के विद्यालयों की होड़ भले ही गांव के सरकारी स्कूल नहीं कर सके किंतु संसाधनों के विकास के लिए कोई कमी भी इन विद्यालयों में नहीं रहे इसका प्रयास जिला कलेक्टर ने किया है। कोरोना काल में भले ही गांव के विद्यालय बच्चों के लिए बंद रहे हो किंतु जिला कलेक्टर द्वारा इन विद्यालयों के संसाधन एवं विकास के लिए प्रयास कभी बन्द नहीं हुए। इन्हीं एक प्रयास को जिला कलेक्टर ने एक अभियान बना दिया यह अभियान आज पूरे राजस्थान में नागौर जिले का नाम रोशन किए हुए है ।
जिला कलेक्टर डॉ जितेंद्र सोनी द्वारा नागौर जिले के समस्त विद्यालयों में विद्युत कनेक्शन के लिए उजास अभियान चलाकर जिले के समस्त विद्यालयों को विद्युत कनेक्शन से जोड़ने का अभियान आरंभ किया जिला कलेक्टर का मानना है जो सत्य भी है कि बिना बिजली के विद्यालयों में संसाधनों की कल्पना करना झुठलाने के समान है। विद्यालयों में लैब हो या आईटी लेब कंप्यूटर हो ऑनलाइन क्लास हो सभी पाठ्य सामग्री एवं जानकारी बिजली पर टिकी है विद्यालय में बगैर बिजली एवं कनेक्शन के कंप्यूटर लैब हो ऑनलाइन क्लासेज के लिए बोर्ड हो या एलईडी हो समस्त इलेक्ट्रॉनिक सामग्री विद्यालयों के एक कमरे में धूल फांक रही थी कहने को विद्यालय में यह संसाधन थे किंतु इनका उपयोग मात्र कागजों में था हकीकत के धरातल पर कंप्यूटर इलेक्ट्रिक बोर्ड ऑनलाइन क्लासेज इन सभी काम बच्चों के लिए एक सपना था। बच्चो का यह स्वपन साकार हो इसके लिए जिला कलेक्टर ने उजास अभियान के द्वारा बच्चों की कल्पना को साकार करते हुए विद्यालय में संसाधनों के उपयोग को हकीकत किया संपूर्ण नागौर जिले में उजास अभियान से पूर्व जिले के 979 विद्यालय विद्युत कनेक्शन से वंचित थे अब हम यह सोच सकते हैं बिना बिजली कनेक्शन इन विद्यालयों की रखे कंप्यूटर इलेक्ट्रिक बोर्ड ऑनलाइन क्लासेज के लिए एलईडी भामाशाह द्वारा दिए गए पंखे की हालत क्या होगी? विद्यालयों में विद्युत कनेक्शन के लिए बिजली विभाग द्वारा एक लाख से अधिक राशि की डिमांड कनेक्शन के लिए जारी हुए ऐसी विषम स्थिति में जिला कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी विद्यालय के पी ई ईओ एवं ग्राम के भामाशाह के बीच सामंजस्य स्थापित कर विद्युत कनेक्शन के लिए विद्युत विभाग द्वारा निकाले डिमांड राशि को जमा करवा विद्यालय को उजास अभियान में
जोड बच्चों के भविष्य में भी उजास किया है। जिले में 979 विद्यालयों में से अब तक 977 विद्यालय विद्युत कनेक्शन से जुड़े हैं। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को आज कंप्यूटर लैब एवं इलेक्ट्रिक बोर्ड ऑनलाइन क्लासेज के लिए एलईडी गर्मी से राहत पाने के लिए पंखे अन्य बिजली आधारित विद्यालय का काम बिजली कनेक्शन के बाद गति पकड़े है।
इसका श्रेय हमारे युवा जिला कलेक्टर डॉ जितेंद्र सोनी को है जिनका अभियान उजास बच्चो के भविष्य के लिए सौगात लाया है
जिले में मात्र 2 विद्यालय ऐसे हैं जिनकी डिमांड राशि अधिक होने की वजह से उजास अभियान में यह विद्यालय नहीं जुड़ पाए हैं।भामाशाह के सहयोग से जल्द ही इन दोनों विद्यालयों को बिजली कनेक्शन से जोड़ने के बाद जिला कलेक्टर द्वारा चलाया गया उजास अभियान शत प्रतिशत सफल होगा जो राजस्थान में एक मिसाल है और इसी सफलता पर हमारे जिला कलेक्टर डॉ जितेंद्र सोनी पर हमें गर्व है ।
इस उपलब्धि पर जिला कलेक्टर का राजस्थान सरकार द्वारा सम्मान किया जाएगा।
हमारे जिला कलेक्टर हमारे गांव व विद्यालय के लिए कितना सोचते हैं हमें इन प्रयासों से ही समझना होगा।
उजास अभियान के बाद कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक बताई गई ऐसे में हमारे जिला कलेक्टर ने जिले में सभी बच्चों के लिए मई-जून में अभियान चलाया जिले में कोई भी बच्चा कुपोषित ना रहे इसके लिए विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केंद्रों पर लगातार सर्वे करवा बच्चों के स्वास्थ्य के लिए पोषक किट का वितरण भामाशाह द्वारा करवा शिक्षक एवं महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चो की जिम्मेदारी दी।
इसका परिणाम यह रहा कि जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या जहां चार हजार थी वहां अब यह संख्या दहाई अंक में है।
विद्यालयों में संसाधनों की कमी नहीं रहे प्रार्थना में बच्चे बारिश धूप में खड़े नहीं रहे इसके लिए जिला कलेक्टर ने जिले में भामाशाह को प्रेरित करते हुए जिले के 161 विद्यालयों में भामाशाह द्वारा कहीं जमीन दान कही आईटी लेब ,विद्यालय में संसाधन जुटाने हो या कक्षा कक्ष का निर्माण करवाना हो इन सभी कार्यों में जिला कलेक्टर द्वारा भामाशाह का सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ।
इसी कड़ी में जिला कलेक्टर की गहरी सोच भी नजर आती है कि कोई भी बच्चा स्कूल में नंगे पांव नहीं जाए इसके लिए गांव के गरीब बच्चों के लिए चरण पादुका के नाम से एक अभियान चलाया है।इस अभियान में भामाशाह के सहयोग से नंगे पांव विद्यालय में जाने वाले बच्चों को शूज पहनाए जाएंगे।

भारत देश गांव में बसता है जब गांव का विकास होगा तो देश भी तरक्की करेगा गांव पर देश का विकास निर्भर करता है और गांव का विकास गांव के विद्यालय है।

अतः हमारे जिला कलेक्टर की कार्यशैली एवं उनके संकल्प से चले अभियान हमें प्रेरित एवं प्रेरणा देते हैं कि हम हमारे गांव के विद्यालय में विकास के लिए कभी पीछे नहीं रहे।

जिला कलेक्टर डॉ जितेंद्र सोनी के सम्मानित होने पर जिले वासियों की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

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