गांव में शिक्षा के मंदिरों में दान देने वाले भामाशाओ का जिला स्तर पर सम्मान

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जिलेभर से डेढ़ सौ भामाशाह ने अपनी अपनी पंचायतों की स्कूलों में बढ़-चढ़कर करवाएं निर्माण एवं संसाधनों के लिए दिया दिल खोल कर दान
भामाशाहो ने जिले के स्कूलों में 8 करोड रुपए की लागत से करवाए विभिन्न काम
खबर ऑफ़ इंडिया
गांव में शिक्षा के मंदिर बने विद्यालयों में बढ़-चढ़कर विद्यालय के उत्थान एवं विकास के लिए दान देने वाले भामाशाह को जिला स्तर पर सम्मानित किए जाने की कवायद चल रही है इस कवायद के तहत पूरे नागौर जिले में वर्ष 20/ 21 में लगभग डेढ़ सौ भामाशाह द्वारा 8 करोड रुपए की राशि नागौर जिले के विभिन्न विद्यालयों में निर्माण कार्य कक्षा कक्ष एवं संसाधनों के लिए दिए गए हैं ऐसे भामाशाओं का हौसला अफजाई एवं अन्य लोगों को इन भामाशाह से प्रेरणा मिले इसके लिए जिला कलेक्टर जितेंद्र सोनी द्वारा दो लाख से अधिक राशि विद्यालय में विकास कार्य संसाधन एवं निर्माण कार्य में देने वाले भामाशाह को सम्मानित किए जाने की कवायद की जा रही है संपूर्ण जिले में भामाशाह के दिए गए संयोग पर अतिरिक्त जिला कलेक्टर मोहनलाल खटनवालिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि नागौर जिले में भामाशाह की कमी नहीं है भामाशाह बढ़-चढ़कर विद्यालयों के विकास में सहयोग कर रहे हैं किसी भामाशाह ने विद्यालय के लिए जमीन दान करी है तो अन्य भामाशाह होने स्कूलों में कक्षा कक्ष के निर्माण सहित टेबल कुर्सी लैब खेल एवं अन्य संसाधन सामग्री के लिए दिल खोलकर पैसा दिया है ऐसे भामाशाह से लोग प्रेरणा लें इसके लिए इन सभी भामाशाह को सम्मानित किए जाने की कवायद की जा रही है संपूर्ण जिले में इन भामाशाह द्वारा वर्ष 20/ 21 के दौरान विद्यालयों में 8 करोड से भी अधिक की राशि दान दी गई है अगर ब्लॉक वार इन भामाशाह पर चर्चा करें तो नागौर जिले के 14 ब्लॉक में नागौर ब्लॉक के 30 विद्यालयों में भामाशाह द्वारा लिए सर्वाधिक एक करोड़ तीन लाख रुपए राशि भामाशाह द्वारा विद्यालयों में निर्माण एवं संसाधनों के लिए दी गई है इसी तरह ब्लॉक जायल में 9 विद्यालयों में 31 लाख रुपए ,कुचामन ब्लॉक के 9 विद्यालयों में 42 लाखों रुपए परबतसर के 11 विद्यालयों में 32लाख रुपए खिवसर के 12 विद्यालयों में ₹55 लाख डीडवाना के 7 विद्यालयों में 23 लाख रुपए डेगाना ब्लॉक में 2 विद्यालयों में ₹6 लाख मकराना ब्लॉक में 6 विद्यालयों में 22 लाख रुपए मेड़ता ब्लॉक के 11 विद्यालयों में 48 लाख रुपए लाडनूं ब्लॉक के 13 विद्यालयों में 68 लाख नावा ब्लॉक के 6 विद्यालयों में 17 लाख रुपए मूंडवा ब्लॉक के 14 विद्यालयों में 53 लाख रुपए एवं रिया बड़ी के 11 विद्यालयों में 47 लाख एवं मौलासर के एक विद्यालय में 5: 50 लाख के लगभग दानदाताओं ने धनराशि कक्ष निर्माण स्टेज खेल सामग्री संसाधनों के लिए प्रदान किए हैं ऐसे सभी भामाशाह से लोग अधिकाधिक प्रेरित हों इसके लिए इन सभी भाषाओं को जिला स्तर पर सम्मानित किए जाने की तैयारियां तेज है। कोविड-19 में विद्यालयों का महत्व गांव में क्या है लोगों ने समझा है कोविड-19 में बाहरी व्यक्तियों को जब इन विद्यालयों में क्वॉरेंटाइन किया गया तो पंचायत की विद्यालयों की दयनीय स्थिति एवं क्वॉरेंटाइन के दौरान नहाने शौचालय की व्यवस्था नहीं होने की परेशानियों से लोग रूबरू हुए एवं विद्यालय के विकास के महत्व को समझा संसाधनों के अभाव में हमारे प्रवासी भाइयों को एहसास हुआ कि इन विद्यालयों में हमें संसाधन एवं विकास की जरूरत है अगर स्कूल डेवलप होते तो क्वॉरेंटाइन में उन्हें परेशानियां नहीं आती इन परेशानियों से निजात पाने के लिए अपने-अपने स्तर के तहत इन विद्यालयों में भामाशाह ने कोरोना काल में भी इन विद्यालयों में विकास कार्य करवाए हैंं।

ये थे भामाशाह/    भामाशाह (1547 – 1600) बाल्यकाल से मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप के मित्र, सहयोगी और विश्वासपात्र सलाहकार थे। अपरिग्रह को जीवन का मूलमन्त्र मानकर संग्रहण की प्रवृत्ति से दूर रहने की चेतना जगाने में आप सदैव अग्रणी रहे। मातृ-भूमि के प्रति अगाध प्रेम था और दानवीरता के लिए भामाशाह नाम इतिहास में अमर है। ऐसे दानवीर के नाम सरकार भामाशाह को सम्मान देती है

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