33 साल की उम्र मुखर्जी में बने कलकत्ता यूनिवर्सिटी युवा वाइस चांसलर

0

यह रिकॉर्ड आज तक किसी ने नहीं तोड़ा
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 120वीं जयंती आज

रियांबड़ी सहित प्रदेश में आज भाजपा मना रही है मुखर्जी की जयंती।
भाजपा अपने नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 120वीं जयंती मनाएगी
कौन थे मुखर्जी देखे
खबर ऑफ़ इंडिया
भाजपा द्वारा राज्यों में मुखर्जी की जयंती पर कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
हाल ही में 23 जून को श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि थी।
इस दिन बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राजधानी में 5 लाख पेड़ लगाने का अभियान शुरू किया था। इस अभियान में प्रदेश एवं मंडल स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने पेड़ पोधे लगाए
दरअसल श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ही जनसंघ की स्थापना की थी।
आज की भाजपा पुरानी जनसंघ पार्टी का ही नया नाम एवं रूप है
श्यामा प्रसाद मुखर्जी पहले शख्स थे जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 का विरोध किया था।
इस कारण वे जेल गए थे। जेल में संदिग्ध परिस्थिति में उनकी मौत हो गई।
पीएम नरेंद्र मोदी अपने संबोधन में अक्सर कहते रहे हैं कि वो जिस भारत की स्थापना में लगे हैं। वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ही सपनों का भारत है।
उनके कई सपने आज साकार हो रहे हैं।
यहां उनसे जुड़े जीवन के कुछ रोचक तथ्यों की जानकारी दे रहे हैं, जो इस प्रकार है-
श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म कलकत्ता में 6 जुलाई 1901 को बंगाल के उच्च प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था. उनके पिता सर आषुतोष मुखर्जी महान अकादमिक और बैरिस्टर थे।
उन्हें बंगाल का टाईगर कहा जाता था।
माता जोगमाया देवी भी उस समय की सबसे विदुषी महिलाओं में थी
अपने पिता की तरह ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भी लॉ की पढ़ाई के लिए विदेश भेजा गया 23 साल की उम्र में उन्होंने लॉ की डिग्री पास की और इसके बाद एमए बंगाली से किया इंग्लिश की अन्य डिग्री भी हासिल की।
सिर्फ 33 साल की उम्र में वे कलकत्ता यूनिवर्सिटी के सबसे युवा वाइस चांसलर बन गए यह रिकॉर्ड आज तक किसी ने नहीं तोड़ा है उनके नेतृत्व में गुरुदेव रवींद्र नाथ टैंगोर ने आधिकारिक रूप से पहली बार बंगाली में भाषण दिया था
1929 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पहली बार कांग्रेस सदस्य के रूप में बंगाल विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए लेकिन अगले ही साल कांग्रेस से असहमति होने पर स्वतंत्र चुनाव लड़ने का फैसला किया और चुनाव जीते।
1942 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया और बंगाल हिन्दू महासभा के अध्यक्ष बनाए गए।
अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष बने. यही से हिन्दुत्व के प्रति उनकी आस्था और मजबूत हुई और कहा जाता है कि हिन्दुत्व की राजनीति का वर्तमान स्वरूप की शुरुआत इसी मोड़ से हुई।
स्वतंत्रता आंदोलन में मुखर्जी ने भारत छोड़ो आंदोलन का बहिष्कार किया था उनका मानना था कि इस कार्यक्रम से लोकप्रिय भावनाओं को भड़काकर देश की सांस्कृतिक अखंडता को खतरे में डाला जा सकता है।
उनका उद्येश्य प्रांत की रक्षा और स्वतंत्रता के लिए था ना कि ब्रिटिश सत्ता के पक्ष में ?
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अगुवाई में जनसंघ ने देश के बंटवारे का विरोध किया था
1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने आरएसस प्रमुख एमएस गोवलकर के परमार्श पर भारतीय जनसंघ की स्थापना की. इस पार्टी का उद्येश्य सभी हिन्दुओं को सांस्कृतिक रूप से एकजुट कर उनमें राजनीतिक और राष्ट्रवादी भावनाओं का बीज बोना था
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने मुखर्जी को अंतरिम सरकार में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में शामिल किया था लेकिन नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली के बीच हुए समझौते के पश्चात उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया था
श्यामा प्रसाद मुखर्जी शुरुआत से ही कश्मीर मे धारा 370 के खिलाफ थे उनका मानना था कि इससे देश की अखंडता को धक्का लगेगा और ये देश की एकता में बाधक होगा
कश्मीर जाने के लिए उस समय लोगों को परमिट लेना होता था. श्यामा प्रसाद इसका विरोध करते हुए कश्मीर पहुंचे जहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
23 जून 1953 को सिर्फ 51 साल की उम्र में संदिग्ध परिस्थिति में उनकी मौत हो गई. कश्मीर में उनके साथ गए अटल बिहारी वाजपेयी ने आरोप लगाया था कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी साजिश के तहत कांग्रेस की सरकार ने हत्या कर दी
कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम था बीजेपी की सरकार जहां हिन्दुत्व की राह पर आगे चल रही है वहीं यह श्यामा प्रसाद मुखर्जी का ही सपना था कि देश सांस्कृतिक अखंडता के रास्ते पर आगे बढ़े
रियांबड़ी
जनसंघ के संस्थापक और प्रखर राष्ट्रवादी नेता डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती मंगलवार की शाम 6 बजे रियांबड़ी भाजपा कार्यकर्ताओ द्वारा भाग्यलक्ष्मी मार्केट रिया बड़ी मे मनायी जाएगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here